Ajj Da Hukamnama Sahib Sri Darbar Sahib Amritsar Sahib, Harmandir Sahib Goldentemple, Morning Mukhwak, Date:- 18-08-20, Ang. 643
Hukamnama in Hindi With Meanings
सलोकु मः ३ ॥ पूरबि लिखिआ कमावणा जि करतै आपि लिखिआसु ॥ मोह ठगउली पाईअनु विसरिआ गुणतासु ॥ {पन्ना 643}
पद्अर्थ: पाईअनु = उस (हरी) ने डाल दी है, दे दी है। गुणतासु = गुणों का खजाना प्रभू।
अर्थ: (पिछले किए कर्मों के अनुसार) आरम्भ से जो (संस्कार रूप लेख) लिखे (भाव, उकरे) हुए हैं और जो करतार ने खुद लिख दिए हैं वे (अवश्य) कमाने पड़ते हैं; (उस लेख के अनुसार ही) मोह की ठॅग बूटी (जिसे) मिल गई है उसे गुणों का खजाना हरी बिसर गया है।
मतु जाणहु जगु जीवदा दूजै भाइ मुइआसु ॥ जिनी गुरमुखि नामु न चेतिओ से बहणि न मिलनी पासि ॥ {पन्ना 643}
अर्थ: (उस) संसार को जीवित ना समझो (जो) माया के मोह में मरा पड़ा है; जिन्होंने सतिगुरू के सन्मुख हो के नाम नहीं सिमरा, उन्हें प्रभू के पास बैठने को नहीं मिलता।
दुखु लागा बहु अति घणा पुतु कलतु न साथि कोई जासि ॥ लोका विचि मुहु काला होआ अंदरि उभे सास ॥ मनमुखा नो को न विसही चुकि गइआ वेसासु ॥ {पन्ना 643}
अर्थ: वे मनमुख बहुत ही दुखी होते हैं, (क्योंकि जिनकी खातिर माया के मोह में मरे पड़े हैं, वह) पुत्र-स्त्री तो कोई साथ नहीं जाएगा; संसार के लोगों में भी उनका मुँह काला हुआ (भाव, शर्मिंदे हुए) और सिसकियां लेते हैं; मनमुखों का कोई विश्वास नहीं करता, उनका ऐतबार खत्म हो जाता है।
नानक गुरमुखा नो सुखु अगला जिना अंतरि नाम निवासु ॥१॥ {पन्ना 643}
अर्थ: हे नानक! गुरमुखों को बहुत सुख होता है क्योंकि उनके हृदय में नाम का निवास होता है।1।


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