Darbar sahib Hukamnama 30/01/2021 Amritsar sahib Golden temple

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Ajj Da Hukamnama Sahib Sri Darbar Sahib Amritsar Sahib, Harmandir Sahib Goldentemple, Morning Mukhwak, Date:- 30-01-21, Ang. 709




Hukamnama in Hindi With Meanings

सलोक ॥ संत उधरण दइआलं आसरं गोपाल कीरतनह ॥ निरमलं संत संगेण ओट नानक परमेसुरह ॥१॥ चंदन चंदु न सरद रुति मूलि न मिटई घांम ॥ सीतलु थीवै नानका जपंदड़ो हरि नामु ॥२॥ {पन्ना 709}
पद्अर्थ: संत उधरण = संतों को (विकारों की तपस से) बचाने वाला। दइआलं = दयालु प्रभू। आसरं गोपाल कीरतनह = (जिन को) गोपाल के कीर्तन का आसरा है, जिन्होंने गोपाल के कीर्तन को अपने जीवन का आसरा बनाया है। संत संगेण = (उन) संतों की संगति करने से।1।
सरद रुति = शरद ऋतु, ठण्ड का मौसम। घांम = धूप, मन की तपस। सीतलु = शांत, ठंड।2।
अर्थ: जो संत जन गोपाल प्रभू के कीर्तन को अपने जीवन का सहारा बना लेते हैं, दयाल प्रभू उन संतों को (माया की तपस से) बचा लेता है, उन संतों की संगति करने से पवित्र हो जाते हैं। हे नानक! (तू भी ऐसे गुरमुखों की संगति में रह के) परमेश्वर का पल्ला पकड़।1।
चाहे चंदन (का लेप किया) हो चाहे चंद्रमा (की चाँदनी) हो, और चाहे ठंडी ऋतु हो - इनसे मन की तपस बिल्कुल भी समाप्त नहीं हो सकती। हे नानक! प्रभू का नाम सिमरने से ही मनुष्य (का मन) शांत होता है।2।
पउड़ी ॥ चरन कमल की ओट उधरे सगल जन ॥ सुणि परतापु गोविंद निरभउ भए मन ॥ तोटि न आवै मूलि संचिआ नामु धन ॥ संत जना सिउ संगु पाईऐ वडै पुन ॥ आठ पहर हरि धिआइ हरि जसु नित सुन ॥१७॥ {पन्ना 709}

पद्अर्थ: ओट = आसरा। सगल = सारे। जन = मनुष्य। परतापु = वडिआई। निरभउ = निडर। तोटि = कमी, घटा। न मूलि = कभी भी नहीं। संचिआ = इकट्ठा किया। वडै पुन = अच्छे भाग्यों से। मिल = कमल का फूल। चरन कमल = कमल के फूल जैसे चरन।
अर्थ: प्रभू के सुंदर चरणों का आसरा ले के सारे जीव (दुनिया की तपस से) बच जाते हैं। गोबिंद की महिमा सुन के (बँदगी वालों के) मन निडर हो जाते हैं। वे प्रभू का नाम-धन इकट्ठा करते हैं और उस धन में कभी घाटा नहीं पड़ता। ऐसे गुरमुखों की संगति बड़े भाग्यों से मिलती है, ये संत जन आठों पहर प्रभू को सिमरते हैं और सदा प्रभू का यश सुनते हैं।17।

Hukamnama in English With Meanings

Salok ||

Santh Oudhharan Dhaeiaalan Aasaran Gopaal Keerathaneh ||

Niramalan Santh Sangaen Outt Naanak Paramaesureh ||1||

Chandhan Chandh N Saradh Ruth Mool N Mittee Ghaanm ||

Seethal Thheevai Naanakaa Japandharro Har Naam ||2||

Pourree ||

Charan Kamal Kee Outt Oudhharae Sagal Jan ||

Sun Parathaap Govindh Nirabho Bheae Man ||

Thott N Aavai Mool Sanchiaa Naam Dhhan ||

Santh Janaa Sio Sang Paaeeai Vaddai Pun ||

Aath Pehar Har Dhhiaae Har Jas Nith Sun ||17||

Meaning: The saint who makes the Kirtan of Gopal Prabhu the support of his life, Dayal Prabhu saves those saints (from the tapas of Maya), becomes holy by associating with those saints.  Hey Nanak!  (You too should be in the company of such Gurmukhs)

 Whether it is sandalwood (moonlight) or moon (moonlight), and whether it is cold weather - it can not eliminate the tapas of the mind at all.  Hey Nanak!  It is only by simmering the name of God that a person's mind becomes peaceful. 2.
Meaning: All creatures (from the tapas of the world) survive by taking care of the beautiful feet of God.  Hearing the glory of Gobind (the people of the people), the mind becomes fearless.  They collect Prabhu's name-money and there is no loss in that money.  The association of such Gurmukhas is associated with great fortune, these saintly people hold on to the eight o'clock and always listen to the glory of the Lord. 17.


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